Karwa Chauth 2026: Sahi Tithi, Shubh Muhurat, Puja Vidhi Aur Vrat Katha

A Hindu married woman looking at the moon through a sieve during Karwa Chauth festival ritual.

Karwa Chauth 2026 ki sahi tithi, shubh muhurat, sargi ka samay, sampurna puja vidhi aur vrat katha ke bare mein vistrit jankari prapt karein.

  • Published Oct 28, 2026
  • By AstroGaon Admin
  • 1 min read

karwa chauth 2026 भारतीय संस्कृति में सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है। यह पावन पर्व पति की लंबी उम्र, सुखी दाम्पत्य जीवन और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है। हर वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का निर्जला व्रत रखा जाता है। इस दिन महिलाएँ सूर्योदय से पूर्व सर्गी ग्रहण करके दिनभर बिना जल और अन्न के कठिन व्रत का पालन करती हैं और रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने के पश्चात ही अपना व्रत खोलती हैं।

इस विस्तृत लेख में हम आपको karwa chauth 2026 की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, सर्गी का सही समय, पूजा सामग्री की सूची, चरण-दर-चरण पूजा विधि, पौराणिक व्रत कथा और चंद्रोदय का समय विस्तार से बता रहे हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • vrat tithi: करवा चौथ 2026 का व्रत कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि को रखा जाएगा।
  • nirjala vrat: यह व्रत पूर्णतः निर्जला होता है, जिसमें सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक जल ग्रहण नहीं किया जाता।
  • sargi mahatva: सास द्वारा दी गई सर्गी को सूर्योदय से पूर्व (ब्रह्म मुहूर्त में) ग्रहण करना अनिवार्य माना जाता है।
  • puja muhurat: संध्या काल में करवा माता, भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश जी की सामूहिक पूजा की जाती है।
  • arghya aur parana: चंद्रोदय के बाद छलनी से पति और चंद्रमा का दर्शन करके जल से अर्घ्य दिया जाता है और पति के हाथों जल पीकर व्रत खोला जाता है।

karwa chauth 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय का समय

हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में चतुर्थी तिथि की शुरुआत और समाप्ति के आधार पर व्रत की मुख्य तिथियाँ इस प्रकार हैं:

  • करवा चौथ 2026 तिथि: 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार (Thursday, October 29, 2026)
  • चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 28 अक्टूबर 2026 को सायं 08:15 बजे से
  • चतुर्थी तिथि समाप्त: 29 अक्टूबर 2026 को सायं 06:45 बजे तक
  • पूजा का शुभ मुहूर्त: सायं 05:40 बजे से सायं 06:55 बजे तक (अवधि: लगभग 1 घंटा 15 मिनट)
  • सर्गी खाने का समय: 29 अक्टूबर 2026 की प्रातः 04:15 बजे से प्रातः 05:10 बजे तक (सूर्योदय से पूर्व)
  • संभावित चंद्रोदय समय: रात्रि 08:12 बजे (अलग-अलग शहरों के अनुसार चंद्रोदय के समय में 5 से 15 मिनट का अंतर हो सकता है)

नोट: भारत के विभिन्न नगरों (जैसे दिल्ली, मुंबई, जयपुर, वाराणसी, कोलकाता) में चंद्रोदय का समय थोड़ा भिन्न हो सकता है, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय अवश्य देखें।


करवा चौथ व्रत का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व

करवा चौथ केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि पति-पत्नी के अटूट प्रेम, त्याग और विश्वास का प्रतीक है। 'करवा' का अर्थ होता है मिट्टी का छोटा बर्तन या लोटा, और 'चौथ' का अर्थ है चतुर्थी तिथि। इस दिन मिट्टी के करवे में जल भरकर पूजा की जाती है और माता पार्वती को सौभाग्य सामग्री अर्पित की जाती है।

1. माता पार्वती और शिव जी का आशीर्वाद

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। करवा चौथ के दिन भगवान शिव, माता पार्वती, कार्तिकेय और श्री गणेश की संयुक्त पूजा करने से वैवाहिक जीवन के सभी तनाव और दोष दूर होते हैं।

2. अखंड सौभाग्य की प्राप्ति

मान्यता है कि जो सुहागिन महिलाएँ सच्चे मन से करवा चौथ का निर्जला व्रत रखती हैं, उनके पति पर आने वाले सभी संकट टल जाते हैं और उन्हें दीर्घायु प्राप्त होती है।


करवा चौथ पूजा के लिए आवश्यक सामग्री (Puja Samagri List)

पूजा की तैयारी एक दिन पूर्व ही कर लेनी चाहिए ताकि पूजा के समय कोई व्यवधान न आए। मुख्य पूजा सामग्री इस प्रकार है:

  1. करवा: मिट्टी या पीतल का करवा (ढक्कन और सींक के साथ)।
  2. सोलह श्रृंगार सामग्री: सिंदूर, बिंदी, चूड़ियाँ, मेहँदी, आलता, पायल, बिछिया, लाल चुनरी, काजल और कंघी।
  3. पूजा का फल व मिष्ठान: फल, मेवे, मट्ठी (मीठी और नमकीन), और घर में बने पकवान।
  4. दीपक व धूप: दीपक (घी का), कपूर, धूपबत्ती और माचिस।
  5. अर्घ्य की थाली: छलनी (छानी), तांबे का लोटा (जल हेतु), रोली, अक्षत (अक्षत चावल), चंदन और फूल।
  6. करवा चौथ माता का चित्र/चित्रपट: करवा माता की तस्वीर या बालू/गोबर से बनाई गई आकृति।
  7. कलावा व दक्षिणा: वस्त्र और सिक्का चढ़ाने के लिए।

करवा चौथ की संपूर्ण पूजा विधि (Step-by-Step Rituals)

करवा चौथ का व्रत तीन मुख्य चरणों में संपन्न होता है — प्रातःकाल की सर्गी, सायं काल की कथा व पूजा, और रात्रि में चंद्र दर्शन एवं अर्घ्य।

प्रथम चरण: प्रातःकाल सर्गी और संकल्प

  • सूर्योदय से पूर्व उठना: प्रातः ब्रह्म मुहूर्त (लगभग 4:00 से 5:00 बजे) में उठकर स्नान करें और स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र धारण करें।
  • सर्गी ग्रहण करना: सास द्वारा तैयार की गई सर्गी (जिसमें फल, मिठाई, सूखे मेवे, फेनियां और मट्ठी शामिल होते हैं) का सेवन करें।
  • व्रत संकल्प: हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर भगवान सूर्य और करवा माता के समक्ष दिनभर निर्जला व्रत रखने का संकल्प लें।

द्वितीय चरण: सायं काल की पूजा और व्रत कथा

  • पूजा स्थल की तैयारी: शाम के समय (लगभग 5:30 बजे) घर के मंदिर या साफ स्थान पर चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं।
  • स्थापना: चौकी पर करवा माता की तस्वीर स्थापित करें। साथ ही शिव-पार्वती और गणेश जी की मूर्ति या चित्र रखें।
  • करवा भरना: मिट्टी के करवे में जल या गेहूं भरें, उसके ढक्कन पर शक्कर या मिठाई रखें और करवे की गर्दन पर कलावा बांधें।
  • सोलह श्रृंगार अर्पण: माता पार्वती को सिंदूर, लाल चुनरी और श्रृंगार का सामान अर्पित करें।
  • कथा श्रवण: सामूहिक रूप से बैठकर हाथ में गेहूं के 13 दाने लेकर करवा चौथ की पावन व्रत कथा सुनें या पढ़ें। कथा समाप्ति के बाद गेहूं के दाने करवा माता को अर्पित करें।

तृतीय चरण: चंद्रोदय, अर्घ्य और व्रत पारण

  • चंद्रोदय का इंतजार: चंद्रोदय होने पर अपनी पूजा की थाली, दीपक और छलनी लेकर छत या आँगन में जाएँ।
  • चंद्र देव की पूजा: थाली में दीपक जलाएं, चंद्रमा को रोली, अक्षत और पुष्प चढ़ाएं।
  • अर्घ्य देना: तांबे के लोटे से चंद्रमा को जल का अर्घ्य दें।
  • छलनी से दर्शन: जलती हुई ज्योति के साथ छलनी से पहले चंद्रमा को देखें और फिर अपने पति का चेहरा देखें।
  • व्रत खोलना: पति के हाथों से जल ग्रहण करें और मिठाई खाकर अपना व्रत पूर्ण करें। इसके पश्चात अपने पति एवं घर के बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।

करवा चौथ की पौराणिक व्रत कथा (Karwa Chauth Vrat Katha)

करवा चौथ से जुड़ी कई प्राचीन कथाएं प्रचलित हैं, जिनमें से वीरवती की कथा सबसे प्रसिद्ध है।

साहूकार की पुत्री वीरवती की कथा

प्राचीन काल में एक साहूकार के सात पुत्र और एक पुत्री थी, जिसका नाम वीरवती था। वीरवती ने विवाह के पश्चात पहली बार अपने मायके में करवा चौथ का व्रत रखा। अत्यधिक भूख और प्यास के कारण वीरवती की स्थिति बिगड़ने लगी। उसके भाइयों से अपनी बहन की यह दशा देखी नहीं गई।

भाइयों ने एक ऊंचे वट वृक्ष के पीछे दीपक जलाकर नकली चंद्रमा का भ्रम उत्पन्न कर दिया और अपनी बहन से कहा कि चंद्रमा निकल आया है, तुम अर्घ्य देकर भोजन कर लो। वीरवती ने अपने भाइयों की बात पर विश्वास करके नकली चंद्रमा को अर्घ्य दिया और भोजन कर लिया।

जैसे ही उसने पहला निवाला खाया, उसे अपने पति के गंभीर रूप से बीमार होने का समाचार मिला। जब उसे अपनी भूल का अहसास हुआ, तो उसने पश्चाताप करते हुए पूरे वर्ष माता पार्वती की आराधना की और अगले करवा चौथ पर पुनः विधि-विधान से निर्जला व्रत रखा। माता पार्वती उसकी भक्ति से प्रसन्न हुईं और उसके पति को पुनः जीवनदान व उत्तम स्वास्थ्य प्रदान किया।


करवा चौथ व्रत के नियम और सावधानियाँ

  1. सफेद या काले वस्त्रों से बचें: पूजा के दौरान काले, नीले या पूरी तरह सफेद रंग के कपड़े पहनने से बचें। लाल, गुलाबी, पीला या मैरून रंग अत्यंत शुभ माना जाता है।
  2. अन्न व जल का त्याग: संकल्प लेने के बाद चंद्र दर्शन तक जल की एक बूंद भी ग्रहण न करें।
  3. तीखी बोली या विवाद से बचें: व्रत के दिन किसी का अनादर न करें, शांत मन से भगवान का ध्यान करें।
  4. सुहाग सामग्री का दान: पूजा के बाद अपनी सास या किसी वयोवृद्ध महिला को सुहाग सामग्री और वस्त्र (बायना) भेंट करें।

गर्भवती और स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त महिलाओं के लिए परामर्श

शास्त्रों के अनुसार स्वास्थ्य सुरक्षा सर्वोपरि है। यदि कोई महिला गर्भवती है, स्तनपान करा रही है या किसी बीमारी (जैसे मधुमेह या उच्च रक्तचाप) से पीड़ित है, तो उन्हें पूर्ण निर्जला व्रत के स्थान पर फलाहार (दूध, फल, जल) लेकर व्रत रखने की छूट है। आप अपने ज्योतिषी या पंडित जी से परामर्श लेकर स्वास्थ्य अनुकूल नियमों का पालन कर सकती हैं।


एस्ट्रोगांव (AstroGaon) से करवा चौथ पूजा और परामर्श

क्या आप करवा चौथ 2026 की पूजा विधि, सही मुहूर्त या व्यक्तिगत कुंडली अनुसार सुहाग योग के बारे में विस्तृत मार्गदर्शन चाहते हैं? AstroGaon आपकी सेवा में सदैव तत्पर है।

  • ऑनलाइन पंडित जी बुकिंग: घर बैठे अपने निवास स्थान पर अनुभवी और वेदपाठी पंडित जी से विधि-विधानपूर्वक करवा चौथ की पूजा संपन्न कराएं (न्यूनतम दक्षिणा ₹1,100 से शुरू)।
  • ज्योतिषीय परामर्श: अपने दाम्पत्य जीवन को अधिक मधुर बनाने और वैवाहिक दोषों के निवारण हेतु हमारे शीर्ष ज्योतिषियों से फोन या वीडियो कॉल पर सलाह लें।
  • व्रत एवं मुहूर्त जानकारी: सटीक पंचांग और स्थानीय चंद्रोदय समय के लिए AstroGaon ऐप डाउनलोड करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: करवा चौथ 2026 की सही तिथि क्या है?

उत्तर: करवा चौथ 2026 का व्रत 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार के दिन रखा जाएगा।

प्रश्न 2: क्या कुंवारी लड़कियाँ भी करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं?

उत्तर: हाँ, मनचाहा और योग्य जीवनसाथी पाने के लिए कुंवारी कन्याएँ भी करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं। वे चंद्रमा के स्थान पर तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं।

प्रश्न 3: यदि बादल छाए रहें और चंद्रमा न दिखे तो क्या करें?

उत्तर: यदि खराब मौसम के कारण चंद्रमा न दिखाई दे, तो पंचांग के अनुसार चंद्रोदय के समय भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान बालचंद्र का ध्यान करके या चंद्रमा के उगने की दिशा में अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जा सकता है।

प्रश्न 4: सर्गी खाने का सबसे सही समय क्या होता है?

उत्तर: सर्गी हमेशा सूर्योदय से लगभग 1 से 2 घंटे पूर्व (ब्रह्म मुहूर्त में) खानी चाहिए। 29 अक्टूबर 2026 को प्रातः 04:15 बजे से 05:10 बजे के बीच सर्गी खाना अत्यंत शुभ रहेगा।

प्रश्न 5: करवा चौथ की पूजा में करवे का क्या महत्व है?

उत्तर: करवा पंचतत्वों और जल का प्रतीक है। करवे से चंद्रमा को जल अर्पित करना जीवन में शीतलता, सुख और समृद्धि लाने का माध्यम माना जाता है।

Related articles